बुधवार, 12 अगस्त 2026 | IST

लंबे इंतजार के बाद राजस्व विभाग का शिकंजा, 197/2 में बेदखली तेज : अर्जुन नरवरे को दो दिन का समय, सिविल जेल की प्रस्तावित कार्रवाई से मचा हड़कंप; 7/3 का नया अतिक्रमण प्रकरण की भी जांच

Khabri Chacha

48 minutes ago 166 views
अर्जुन नरवरे को दो दिन का समय, सिविल जेल की प्रस्तावित कार्रवाई से मचा हड़कंप; 7/3 का नया अतिक्रमण प्रकरण की भी जांच

नैनपुर (मंडला)। ग्राम उमरिया, हल्का उमरिया स्थित शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 197/2 के मामले में लंबे इंतजार के बाद राजस्व विभाग अब सख्त कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है। तहसीलदार ने 12 अगस्त 2026 के आदेश में अर्जुन नरवरे को भूमि खाली करने के लिए दो दिवस का समय दिया है। निर्धारित अवधि में भूमि खाली नहीं करने की स्थिति में आगे की वैधानिक कार्रवाई के साथ सिविल जेल की कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।

इसे लंबे समय से चल रहे मामले में राजस्व विभाग की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सिविल जेल की प्रस्तावित कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में बेचैनी बढ़ने की चर्चा है, क्योंकि अब मामला केवल नोटिस और कागजी आदेशों तक सीमित दिखाई नहीं दे रहा।

गौरतलब है कि इसी भूमि के संबंध में तहसीलदार न्यायालय द्वारा 26 सितंबर 2025 को बेदखली का आदेश पहले ही पारित किया जा चुका था। इसके बावजूद लंबे समय तक भूमि शासन के वास्तविक कब्जे में नहीं आ सकी। अब करीब 11 माह बाद दो दिन का समय और उसके बाद सिविल जेल की प्रस्तावित कार्रवाई ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

जनता और शासन के हित से जुड़ा मामला

स्थानीय लोगों का कहना है कि शासकीय जमीन पर कब्जे और उसके बाद जमीन के कथित विक्रय जैसे मामलों में यदि कोई व्यक्ति शासन और आम लोगों को गुमराह करके आर्थिक लाभ उठाता है, तो ऐसे मामलों में केवल जमीन खाली करवाना पर्याप्त नहीं होना चाहिए। पूरे लेन-देन और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए।

इसी कारण 197/2 की बेदखली के साथ-साथ संबंधित भूमि से जुड़े कथित विक्रय और प्लॉटिंग की जांच की मांग भी तेज हो गई है। यदि जांच में शासकीय भूमि अथवा स्वामित्व से बाहर की भूमि को निजी बताकर बेचने, गलत दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराने या खरीदारों को गुमराह करने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ लागू आपराधिक प्रावधानों में कार्रवाई की मांग उठ रही है।

7/3 में नया अतिक्रमण प्रकरण भी दर्ज

मामला सिर्फ 197/2 तक सीमित नहीं है। हल्का उमरिया के खसरा क्रमांक 7/3 में भी हाल ही में अतिक्रमण का नया प्रकरण दर्ज किया गया है। इसमें अर्जुन नरवरे और उनके परिवार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

एक तरफ 197/2 में पुराना बेदखली आदेश, दूसरी तरफ 7/3 में नया अतिक्रमण प्रकरण और तीसरी तरफ जमीन के कथित विक्रय से जुड़े सवाल—इन सभी घटनाक्रमों ने अब पूरे मामले की व्यापक जांच की जरूरत को बढ़ा दिया है।

कथित जमीन बिक्री की भी खुलेगी परत?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित भूमि से जुड़े कथित विक्रयों में वास्तव में कितनी जमीन उपलब्ध थी और कितने रकबे की रजिस्ट्रियां हुईं। इसकी वास्तविक तस्वीर खसरा, बी-1, नक्शा, रजिस्ट्री और मौके की भूमि का मिलान होने के बाद ही सामने आएगी।

यदि जांच में वास्तविक भूमि से अधिक रकबे की रजिस्ट्रियां, शासकीय भूमि का निजी भूमि के रूप में विक्रय या खरीदारों के साथ धोखाधड़ी जैसे तथ्य सामने आते हैं, तो मामला गंभीर आपराधिक जांच का विषय बन सकता है।

सिविल जेल की कार्रवाई ने दिया कड़ा संदेश

राजस्व विभाग द्वारा सिविल जेल की कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने को स्थानीय लोग अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कड़ा संदेश मान रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को अब यह समझना होगा कि वर्षों तक कब्जा बनाए रखना कार्रवाई से बचने की गारंटी नहीं है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दो दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन 197/2 की जमीन को वास्तव में शासन के कब्जे में लेता है या नहीं। साथ ही 7/3 के नए अतिक्रमण प्रकरण और कथित भूमि विक्रयों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर भी लोगों की नजर है।

फिलहाल राजस्व विभाग के शिकंजे और प्रस्तावित सिविल जेल की कार्रवाई से उन लोगों में बेचैनी जरूर बढ़ी है, जिन पर शासकीय भूमि पर कब्जे और जमीन के कथित लेन-देन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

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