फर्जी सदस्यता के सहारे बनी नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति? : नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति पर गंभीर आरोप, कॉलोनियों और मकानों को कृषि भूमि बताकर सदस्य बनाने का दावा;
Khabri Chacha
नैनपुर/मंडला। नैनपुर की नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति क्रमांक-833 एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने सहकारिता विभाग, कलेक्टर, आयुक्त सहकारिता, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित विभिन्न सक्षम अधिकारियों को विस्तृत शिकायत एवं दस्तावेज सौंपते हुए आरोप लगाया है कि समिति का गठन सहकारिता नियमों और उपविधियों के अनुरूप नहीं किया गया, बल्कि कथित रूप से अपात्र सदस्यों, गलत भूमि विवरण और भ्रामक जानकारी के आधार पर पंजीयन प्राप्त किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं दस्तावेज आधारित जांच कराई जाए तो समिति के गठन से लेकर उसके संचालन तक की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति: कृषि भूमि के बजाय कॉलोनियों और मकानों को सदस्यता का आधार बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि समिति के कई सदस्यों के पास सदस्यता के लिए आवश्यक कृषि भूमि ही उपलब्ध नहीं थी। उनका दावा है कि राजस्व अभिलेखों के परीक्षण से पता चलता है कि कुछ सदस्यों के नाम दर्ज भूमि पर वर्षों से खेती नहीं हो रही, बल्कि वहां कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। वहीं कुछ मामलों में जिन स्थानों पर स्थायी मकान बने हुए हैं, उन्हें भी कथित रूप से कृषि भूमि के रूप में दर्शाकर सदस्यता दिलाई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि प्रत्येक सदस्य की भूमि का मौके पर निरीक्षण, खसरा, बी-1, गिरदावरी और वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाए तो कई गंभीर विसंगतियां सामने आ सकती हैं।
नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति: एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले लोगों को भी सदस्य बनाने का दावा
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि समिति में ऐसे लोगों को भी सदस्य बनाया गया जिनके पास एक हेक्टेयर कृषि भूमि तक नहीं थी। उनका कहना है कि बीज उत्पादक सहकारी समिति का उद्देश्य किसानों को संगठित कर बीज उत्पादन को बढ़ावा देना है, इसलिए सदस्यता के समय भूमि एवं पात्रता का सही परीक्षण होना आवश्यक था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि यह परीक्षण सही ढंग से किया जाता तो कई सदस्य पात्र ही नहीं पाए जाते।
नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति: पंजीयन फाइल और सदस्यता दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग
शिकायत में यह भी कहा गया है कि समिति के गठन के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज, सदस्यता आवेदन, भूमि सत्यापन रिपोर्ट और पंजीयन फाइल की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन अभिलेखों का राजस्व रिकॉर्ड से मिलान करने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि समिति को पंजीयन किन तथ्यों और किन दस्तावेजों के आधार पर प्रदान किया गया। उनका आरोप है कि यदि जांच में गलत जानकारी या भ्रामक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी विषय होगा।

नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति: डीएपी, यूरिया और वित्तीय रिकॉर्ड की भी हो गहन जांच
शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि समिति को वर्ष 2012-13 से 2022-23 के बीच मिले डीएपी, यूरिया, बीज, अनुदान, बैंक खातों, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, विक्रय रजिस्टर तथा ऑडिट रिपोर्ट की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि सदस्यता प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में है तो समिति के माध्यम से हुए सभी वित्तीय एवं कृषि संबंधी लेनदेन की भी गहन जांच आवश्यक है।
नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति: उच्चस्तरीय जांच, समिति भंग करने और वैधानिक कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल विभागीय प्रतिवेदन से सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने मांग की है कि समिति की पूरी पंजीयन फाइल, सदस्यता आवेदन, भूमि अभिलेख, बैंक रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट तथा अन्य मूल दस्तावेजों को सुरक्षित कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि अपात्र व्यक्तियों को सदस्य बनाया गया, गलत या भ्रामक जानकारी के आधार पर समिति का पंजीयन कराया गया या अन्य अनियमितताएं हुईं, तो कानून के अनुसार जिम्मेदार व्यक्तियों तथा यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक समिति के संचालन पर रोक लगाने और आवश्यक होने पर उसके पंजीयन को निरस्त करने पर भी विचार किया जाए।
(नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही होगी।)