GeM से बचत या महंगी खरीद? नैनपुर नगर पालिका की खरीदी पर बड़े सवाल : उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर लाइट, अग्निशमन यंत्र, झूले सहित कई खरीदारियों पर सवाल; उच्चस्तरीय जांच की मांग
Khabri Chacha
नैनपुर | सरकार ने Government e-Marketplace (GeM) की शुरुआत एक बड़े उद्देश्य के साथ की थी। मंशा स्पष्ट थी—सरकारी खरीद में पारदर्शिता आए, बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो, विभागों को प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिले और जनता के टैक्स के पैसे की बचत हो। लेकिन नैनपुर नगर पालिका की GeM खरीदी से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज़ अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार नगर पालिका द्वारा स्ट्रीट लाइट, फ्लड लाइट, हाईमास्ट, डेकोरेटिव पोल, इलेक्ट्रिकल सामग्री, अग्निशमन यंत्र, बच्चों के झूले, फिसल पट्टी, बेंच, डस्टबिन सहित अनेक सामग्रियों की खरीदी की गई है। इन्हीं दस्तावेज़ों में दर्ज तकनीकी विवरण, कैटलॉग और खरीद संबंधी अभिलेखों के आधार पर इन खरीदारियों की कीमत, चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस GeM पोर्टल को सरकारी धन की बचत का सबसे प्रभावी माध्यम बताया गया, यदि उसी पोर्टल के माध्यम से हुई खरीदी पर ही सवाल उठने लगें, तो फिर जनता आखिर किस पर भरोसा करे? क्या हर खरीदी में उपलब्ध विकल्पों का सही मूल्यांकन किया गया? क्या विभाग ने सबसे उपयुक्त और किफायती सामग्री का चयन किया? इन सवालों का जवाब अब केवल निष्पक्ष जांच ही दे सकती है।
उपलब्ध दस्तावेज़ों में प्रकाश व्यवस्था से जुड़े अनेक आइटम, हाईमास्ट, बच्चों के खेल उपकरण, अग्निशमन यंत्र तथा अन्य सामग्रियों का विस्तृत विवरण दर्ज है। इन्हीं अभिलेखों के आधार पर मांग उठ रही है कि प्रत्येक आइटम की GeM खरीद कीमत, उस समय उपलब्ध तुलनात्मक दर, भुगतान अभिलेख, निरीक्षण रिपोर्ट तथा तकनीकी स्पेसिफिकेशन की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है कि क्या नगर पालिका परिषद के सभी पार्षदों को प्रत्येक बड़ी खरीदी की पूरी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? क्या प्रत्येक आइटम की स्पेसिफिकेशन, ब्रांड, मॉडल, अनुमानित लागत और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी परिषद के समक्ष रखी गई? यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पारदर्शी खरीद प्रक्रिया की भावना पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। आखिर यदि जनप्रतिनिधियों को ही पूरी जानकारी नहीं होगी तो वे जनता के हितों की प्रभावी निगरानी कैसे करेंगे?
नैनपुर में वर्तमान परिषद के कार्यकाल के दौरान प्रकाश व्यवस्था पर लगभग 40 लाख रुपये से अधिक की खरीदी होने की चर्चा है, जबकि लगभग 30 लाख रुपये का एक नया टेंडर भी प्रक्रिया में बताया जा रहा है। ऐसे में नागरिकों का एक वर्ग मांग कर रहा है कि जब तक मौजूदा खरीदारियों की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित नए टेंडरों पर भी पुनर्विचार किया जाए, ताकि किसी भी संभावित विवाद से बचा जा सके।
गौरतलब है कि नैनपुर नगर पालिका में खरीद और टेंडर प्रक्रिया पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व परिषद के कार्यकाल में टेंडर संबंधी मामले की विभागीय जांच हुई थी, जिसमें तत्कालीन CMO एवं उपयंत्री के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने के आदेश जारी हुए थे। अब GeM पोर्टल के माध्यम से हुई वर्तमान खरीदी पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों मामलों में शिकायतकर्ता भी एक ही है। इससे नगर पालिका की खरीद प्रक्रिया को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों ने एक बार फिर प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर मंडला सहित अन्य सक्षम मंचों, जैसे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के समक्ष भी प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है। शिकायत में मांग की जाएगी कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, नियमों के उल्लंघन या शासकीय धन की हानि सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आखिर सवाल केवल सामान खरीदने का नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और जनता के पैसे का है। GeM का उद्देश्य सरकारी खरीद को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और किफायती बनाना था। यदि उसी व्यवस्था के तहत हुई खरीदी को लेकर इतने गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, तो उनका उत्तर भी पूरी पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए।
जनता अब सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही है—क्या GeM का उद्देश्य पूरा हुआ, या फिर नैनपुर में सरकारी खरीद की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच का समय आ गया है?