नैनपुर मुक्तिधाम गौशाला में फिर दो गौवंश की मौत, बढ़ी जनचिंता : एसडीएम को सौंपा गया आवेदन, श्मशान भूमि से गौशाला हटाने की मांग; लगातार मौतों से व्यवस्था पर सवाल
Khabri Chacha
नैनपुर।
नैनपुर के मुक्तिधाम परिसर में संचालित गौशाला में मंगलवार सुबह दो और गौवंश की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों में मृत गौवंश की संख्या लगातार बढ़ने से नगर में चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लगातार हो रही इन घटनाओं ने गौशाला की व्यवस्था और संचालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
कुछ दिन पहले गौवंश की लगातार हो रही मौतों के बाद एसडीएम नैनपुर के निर्देश पर डिप्टी डायरेक्टर, पशु चिकित्सा विभाग, मंडला डॉ. उग्रसेन तिवारी अपनी टीम के साथ गौशाला पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान गौवंश का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा भविष्य में किसी भी गौवंश की मृत्यु होने पर अनिवार्य पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए गए थे, ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। अब दो और गौवंश की मौत के बाद लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।

इधर, पूरे मामले को लेकर एक विस्तृत शिकायत पत्र भी एसडीएम नैनपुर को सौंपा गया है। आवेदन में राजस्व अभिलेखों में "मध्यप्रदेश शासन – हिन्दुओं का श्मशान घाट" दर्ज भूमि पर गौशाला संचालित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे विधिसम्मत स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की गई है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुक्तिधाम परिसर में दानदाताओं द्वारा वर्षों पूर्व अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए बनाए गए चबूतरों पर गौवंश बांधे जा रहे हैं तथा जहां अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां और कंडे रखे जाते थे, वहां गौशाला का सामान रखा जा रहा है। साथ ही परिसर में चारा, सब्जियों के अवशेष और अन्य सामग्री बिखरी रहने से मुक्तिधाम की गरिमा प्रभावित होने का भी उल्लेख किया गया है।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि गौशाला बनने के बावजूद बड़ी संख्या में गौवंश आज भी नगर की सड़कों पर घूमते दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि गौशाला का उद्देश्य निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय देना है, तो पशु अब भी सड़कों पर क्यों भटक रहे हैं।
इस पूरे मामले का धार्मिक पक्ष भी अब चर्चा का विषय बन गया है। नगर के कई नागरिकों का कहना है कि हिन्दू धार्मिक परंपराओं में मुक्तिधाम अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है और वहां गौशाला का संचालन उचित नहीं माना जाता। लगातार हो रही गौवंश की मौतों के बाद लोगों के बीच यह चर्चा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। कई नागरिक इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक संवेदनशीलता से जुड़ा विषय मान रहे हैं।
नगर में लगातार हो रही गौवंश की मौतों ने लोगों के मन में भय और चिंता का वातावरण बना दिया है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से मृत गौवंश का पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने, गौशाला की संपूर्ण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने, संचालन की वैधानिकता स्पष्ट करने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं कि लगातार हो रही गौवंश की मौतों के इस संवेदनशील मामले में केवल जांच के निर्देश दिए जाएंगे या वास्तव में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और मुक्तिधाम की गरिमा भी बनी रहे।