गरीबों के रोजगार पर ताला, फिल्टर प्लांट में जंग खा रहीं नगर पालिका की गुमटियां : लाखों रुपये खर्च कर बनाई गईं गुमटियां वर्षों से नहीं बंटी, बारिश-धूप में खराब हो रही सरकारी संपत्ति।
Khabri Chacha
नैनपुर।
गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर पालिका नैनपुर द्वारा तैयार कराई गई लोहे की गुमटियां आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही हैं। जिन गुमटियों से बेरोजगार युवाओं और गरीब परिवारों को रोजगार मिलने की उम्मीद थी, वे आज नगर पालिका के फिल्टर प्लांट परिसर में वर्षों से बिना उपयोग के खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई हैं। समय पर वितरण नहीं होने के कारण इन पर जंग लगने लगी है और इनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने इन गुमटियों का निर्माण इस उद्देश्य से कराया था कि पात्र हितग्राहियों को उनका आवंटन कर उन्हें चाय-नाश्ता, किराना, फल-सब्जी, स्टेशनरी अथवा अन्य छोटे व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल सके। लेकिन योजना का लाभ आज तक किसी भी जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाया। निर्माण के बाद गुमटियां फिल्टर प्लांट परिसर में रखवा दी गईं और वहीं वर्षों से बेकार पड़ी हैं।
बारिश, धूप और मौसम की मार के कारण गुमटियों की टीन और लोहे के ढांचे पर असर साफ दिखाई देने लगा है। यदि समय रहते इनका उपयोग नहीं किया गया तो भविष्य में इनकी मरम्मत पर भी अतिरिक्त सरकारी राशि खर्च करनी पड़ सकती है। यानी जिस योजना से गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना था, वही योजना अब सरकारी संपत्ति के नुकसान का कारण बनती दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका की लापरवाही के कारण जनता के टैक्स से खर्च किए गए लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे बर्बाद हो रही है। लोगों का सवाल है कि जब गुमटियों का निर्माण पूरा हो चुका था, तो उनका वितरण अब तक क्यों नहीं किया गया? यदि किसी कारणवश वितरण नहीं हो सका तो वर्षों तक इन्हें खुले में छोड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?
नगरवासियों का मानना है कि यदि समय पर इन गुमटियों का आवंटन कर दिया जाता तो कई बेरोजगार युवक और गरीब परिवार अपना रोजगार शुरू कर चुके होते। इससे एक ओर लोगों की आजीविका मजबूत होती, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका की योजना भी सफल साबित होती। लेकिन वर्तमान स्थिति में न तो गरीबों को रोजगार मिला और न ही जनता के पैसे से तैयार की गई सरकारी संपत्ति का कोई उपयोग हो पा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन गुमटियों के निर्माण पर खर्च हुई राशि का लाभ किसे मिला? क्या यह योजना केवल निर्माण तक ही सीमित रह गई? यदि वितरण होना ही नहीं था तो लाखों रुपये खर्च कर इनका निर्माण क्यों कराया गया?
नगरवासियों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, गुमटियों के निर्माण एवं वितरण में हुई देरी की जिम्मेदारी तय की जाए तथा पात्र हितग्राहियों को शीघ्र इनका आवंटन कर सरकारी संपत्ति को बर्बाद होने से बचाया जाए। जनता का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि जनता के टैक्स से बनी संपत्तियों को वर्षों तक खुले में जंग खाने के लिए छोड़ देना।