गुरूवार, 23 जुलाई 2026 | IST

56 एकड़ सरकारी भूमि फिर विवादों में, बेदखली के बाद लौट आया अतिक्रमण! : स्थानीय लोगों की मांग—शासन इस भूमि को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवंटित करने पर विचार करे

Khabri Chacha

1 hour ago 50 views
स्थानीय लोगों की मांग—शासन इस भूमि को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवंटित करने पर विचार करे

नैनपुर (मंडला) | विशेष रिपोर्ट

ग्राम इटका की लगभग 56 एकड़ शासकीय भूमि एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जिस भूमि को राजस्व प्रशासन ने पहले अतिक्रमण मुक्त कराया था, उसी पर अब स्थानीय लोगों के अनुसार दोबारा अतिक्रमण होने लगा है। इससे न केवल बेदखली अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि शासकीय भूमि की सुरक्षा व्यवस्था भी कटघरे में दिखाई दे रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बेदखली के बाद इस भूमि की नियमित निगरानी की जाती और उसकी सीमाएं सुरक्षित रखी जातीं, तो दोबारा अतिक्रमण की स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों का सवाल है कि करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि को मुक्त कराने के बाद उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?

जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी एकमुश्त शासकीय भूमि का उपयोग केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनहित के स्थायी कार्यों में लगाया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन चाहे, तो इस भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सैकड़ों गरीब एवं बेघर परिवारों के लिए आवास विकसित किए जा सकते हैं। इससे एक ओर जरूरतमंद परिवारों को स्थायी आवास मिलेगा, वहीं दूसरी ओर भूमि पर दोबारा अतिक्रमण की संभावना भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

नागरिकों का यह भी कहना है कि नैनपुर क्षेत्र में आज भी अनेक पात्र परिवार ऐसे हैं जो सरकारी आवास योजना का लाभ मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में यदि उपलब्ध शासकीय भूमि का उपयोग गरीबों के आवास के लिए किया जाता है, तो यह जनहित का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि 56 एकड़ भूमि की वर्तमान स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। यदि दोबारा अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाकर भूमि को सुरक्षित किया जाए तथा शासन स्तर पर इस भूमि को प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना के लिए आवंटित करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बहुमूल्य शासकीय भूमि को बार-बार अतिक्रमण का शिकार बनने देगा, या फिर इसे सुरक्षित रखकर गरीबों के लिए एक नई आवासीय बस्ती बसाने की दिशा में ठोस पहल करेगा? यही प्रश्न आज नैनपुर की जनता प्रशासन और शासन दोनों के सामने रख रही है।

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