बुधवार, 12 अगस्त 2026 | IST

नैनपुर नगर पालिका से फिर निकला ‘टेंडर घोटाले’ का भूत, शिकायतकर्ता वही : पिछली बार CMO-उपयंत्री पर FIR का आदेश हुआ था, अब GeM खरीदी में SDM ने जांच दल बनाया, क्या फिर वही होगा?

Khabri Chacha

11 hours ago 98 views
पिछली बार CMO-उपयंत्री पर FIR का आदेश हुआ था, अब GeM खरीदी में SDM ने जांच दल बनाया, क्या फिर वही होगा?

नैनपुर। नगर पालिका परिषद नैनपुर की खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई विभिन्न सामग्रियों की खरीदी से जुड़ा है। खरीदी दरों को लेकर की गई शिकायत पर SDM नैनपुर ने जांच दल गठित कर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। शिकायतकर्ता ने उपलब्ध दस्तावेजों और बाजार से प्राप्त तुलनात्मक दरों के आधार पर कई खरीदारियों में प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की संभावना जताते हुए जांच की मांग की है।

पिछली कहानी से वर्तमान मामले तक...

नैनपुर नगर पालिका में टेंडर और खरीदी से जुड़े विवाद का यह पहला मामला नहीं है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पिछली परिषद के कार्यकाल में भी टेंडर संबंधी प्रकरण सामने आया था, जिसमें विभागीय जांच के बाद तत्कालीन CMO और उपयंत्री के विरुद्ध FIR दर्ज किए जाने के आदेश हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि उस मामले के शिकायतकर्ता और वर्तमान GeM खरीदी मामले के शिकायतकर्ता एक ही हैं।

यही वजह है कि अब शहर में सवाल उठ रहा है—क्या नगर पालिका की खरीदी व्यवस्था में फिर वही कहानी दोहराई जा रही है या इस बार जांच में मामला केवल प्रक्रियागत कमी तक सीमित निकलता है?

GeM पर खरीदी, लेकिन दरों पर सवाल

शिकायतकर्ता ने नगर पालिका से RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर GeM खरीदी की दरों का तुलनात्मक अध्ययन किया है। इसके अलावा अन्य GeM विक्रेताओं/ठेकेदारों से कोटेशन प्राप्त कर, स्थानीय बाजार दरों  पर उपलब्ध कीमतों से भी तुलना की गई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार इस तुलना में कई वस्तुओं की GeM खरीदी दर और उपलब्ध तुलनात्मक बाजार दर के बीच काफी अंतर सामने आया है। आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन दरों का अंतिम सत्यापन सक्षम तकनीकी एवं वित्तीय जांच के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।

बच्चों के झूले से अग्निशमन यंत्र तक सवाल

शिकायत के साथ प्रस्तुत तुलनात्मक विवरण में बच्चों के झूले, फिसल पट्टी, अग्निशमन यंत्र, हाईमास्ट, LED फ्लड लाइट, स्ट्रीट लाइट, डेकोरेटिव पोल, बेंच, चेयर और अन्य सामग्री को शामिल किया गया है।

दस्तावेजों में उदाहरण के तौर पर बच्चों के झूले की GeM खरीदी दर ₹34,750 के मुकाबले तुलनात्मक बाजार मूल्य ₹13,500 तथा फिसल पट्टी की ₹37,900 के मुकाबले ₹16,000 दर्शाई गई है। 6 किलोग्राम अग्निशमन यंत्र के लिए ₹4,550 के मुकाबले ₹1,500 का तुलनात्मक मूल्य दर्शाया गया है।

इसी तरह 9 मीटर 6-लाइट हाईमास्ट की दर ₹2.20 लाख के मुकाबले तुलनात्मक मूल्य ₹50 हजार और 12 मीटर 8-लाइट हाईमास्ट की दर ₹3.55 लाख के मुकाबले ₹1.10 लाख दर्शाई गई है।

LED फ्लड लाइट सहित अन्य लाइटिंग सामग्री में भी शिकायतकर्ता ने बड़ा मूल्य अंतर दर्शाया है। हालांकि आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि बाजार मूल्य तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित हैं और वास्तविक मूल्य का अंतिम निर्धारण स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता की मांग—सिर्फ दर नहीं, पूरी प्रक्रिया की जांच हो

शिकायतकर्ता ने केवल बाजार और GeM दर के अंतर की जांच की मांग नहीं की है, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग की है। इसमें GeM ऑर्डर, बिल, भुगतान अभिलेख, तकनीकी specifications, स्वीकृति प्रक्रिया, निरीक्षण, स्टॉक एंट्री और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण शामिल है।

इसके साथ ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी लक्ष्मण सिंह सारस, इंजीनियर अभिलाष श्रीवास्तव और GeM ऑपरेटर यशवंत रजक सहित खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है।

“अभी तो उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर है”

शिकायत का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने स्वयं कहा है कि प्रस्तुत तुलनात्मक तालिका RTI से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों तक सीमित है। उसके अनुसार नगर पालिका की GeM खरीदी से संबंधित सभी दस्तावेज उसे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि शेष GeM खरीदी, बिल, भुगतान और अन्य अभिलेख भी जांच में शामिल किए जाएं। आवेदन में यह संभावना जताई गई है कि संपूर्ण रिकॉर्ड सामने आने पर अन्य वित्तीय विसंगतियां भी सामने आ सकती हैं।

अब जांच दल की रिपोर्ट बताएगी—सवाल सही या खरीद सही?

SDM द्वारा जांच दल गठित किए जाने के बाद अब गेंद जांच दल के पाले में है। जांच में यदि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तुलनात्मक दरों की पुष्टि होती है और खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता अथवा शासकीय धन की वास्तविक हानि सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे की कार्रवाई हो सकती है।

अब नजर जांच दल की रिपोर्ट पर है।

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