शनिवार, 25 जुलाई 2026 | IST

मंदिर भूमि और बीज समिति मामले में वैष्णव व नरवरे परिवार की भूमिका पर सवाल : शरदचंद्र वैष्णव, राजीव वैष्णव, अर्जुन, शिवचरण, भीम व गीता बाई नरवरे सहित कई बिंदुओं पर जांच की मांग

Khabri Chacha

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शरदचंद्र वैष्णव, राजीव वैष्णव, अर्जुन, शिवचरण, भीम व गीता बाई नरवरे सहित कई बिंदुओं पर जांच की मांग

नैनपुर। श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर की सार्वजनिक न्यास भूमि और नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति क्रमांक-833 से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, सहकारिता विभाग के रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे प्रकरण में कई स्तरों पर जांच की मांग उठाई गई है। शिकायत में मंदिर की भूमि, सहकारी समिति के गठन, सदस्यता, पात्रता, वित्तीय अभिलेख, उर्वरक वितरण तथा संबंधित व्यक्तियों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

मामले में कहा गया है कि श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर की खसरा क्रमांक-8, रकबा 4.6960 हेक्टेयर (लगभग 11.60 एकड़) सार्वजनिक न्यास भूमि को आधार बनाकर नवदुर्गा बीज उत्पादक सहकारी समिति क्रमांक-833 के गठन की वैधानिक प्रक्रिया की जांच आवश्यक है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि समिति गठन के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मंदिर की चल-अचल संपत्ति, आय-व्यय, दान-चढ़ावा, बैंक खाते, लेखा-बही, ऑडिट रिपोर्ट और सार्वजनिक न्यास से जुड़े सभी वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सार्वजनिक संपत्ति का प्रबंधन नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।

सहकारी समिति को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। शिकायत में समिति की मूल पंजीयन फाइल, गठन की प्रक्रिया, प्रत्येक सदस्य की पात्रता, सदस्यता के समय प्रस्तुत दस्तावेज, राजस्व अभिलेख, खसरा, बी-1 तथा स्थल निरीक्षण के आधार पर प्रत्येक सदस्य की भूमि का सत्यापन कराने की मांग की गई है।

दस्तावेजों में विशेष रूप से शरदचंद्र वैष्णव उर्फ रामभजन, उनके पुत्र राजीव (राजू) वैष्णव, अर्जुन नरवरे, शिवचरण नरवरे, भीम नरवरे तथा गीता बाई नरवरे की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि इन सभी की भूमिका का राजस्व अभिलेखों, सहकारिता विभाग के रिकॉर्ड, सार्वजनिक न्यास के दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर परीक्षण किया जाए तथा यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या विधि-विरुद्ध कार्रवाई प्रमाणित होती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ सदस्यों को जिन भूमियों के आधार पर समिति की सदस्यता दी गई, उनमें से कुछ भूमि वास्तविक कृषि उपयोग में नहीं है तथा कुछ स्थानों पर आवासीय उपयोग या प्लॉट होने के बावजूद उन्हें कृषि भूमि के रूप में दर्शाया गया है। इसलिए प्रत्येक सदस्य की भूमि का स्वतंत्र राजस्व एवं स्थल निरीक्षण कर सत्यापन कराने की मांग की गई है।

इसके अलावा समिति को प्राप्त डीएपी, यूरिया, बीज तथा अन्य शासकीय लाभ, उनके वितरण, स्टॉक रजिस्टर, बैंक खातों, लेखा-बही, ऑडिट अभिलेख तथा समिति के संचालन से जुड़े सभी रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है। शिकायत में कहा गया है कि इन अभिलेखों के परीक्षण से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

मामले में यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक मंदिर एवं समिति से जुड़े मूल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं, ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न रहे। यदि जांच में कोई अनियमितता या कानून का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाए।

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