बुधवार, 16 सितम्बर 2026 | IST

सार्थक पोर्टल की ई-अटेंडेंस पर सवाल, कृषि अधिकारी पर गंभीर आरोप : गमछा बांधकर अटेंडेंस लगाने वाला व्यक्ति दूसरा होने का दावा, दो साल से कार्यवाही का इंतजार; कलेक्टर को भेजी गई फाइल

Khabri Chacha

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गमछा बांधकर अटेंडेंस लगाने वाला व्यक्ति दूसरा होने का दावा, दो साल से कार्यवाही का इंतजार; कलेक्टर को भेजी गई फाइल

मंडला। सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बनाए गए सार्थक पोर्टल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंडला कृषि विभाग में पदस्थ असिस्टेंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर देवेंद्र कुमार बारस्कर की ई-अटेंडेंस को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि अधिकारी अपनी ई-अटेंडेंस दूसरे लोगों से लगवाते हैं। अब सामने आई अटेंडेंस रिपोर्ट में दर्ज तस्वीरों ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

गमछा बांधकर अटेंडेंस लगाने वाला व्यक्ति दूसरा होने का दावा

प्राप्त सार्थक पोर्टल की 10 पेज की रिपोर्ट में देवेंद्र कुमार बरास्कर के नाम से 8 जून से 22 जून 2026 तक की उपस्थिति दर्ज है। रिपोर्ट में चेक-इन, चेक-आउट, फोटो और लोकेशन का विवरण दिया गया है।

रिपोर्ट की तस्वीरों में कई जगह चेहरे पर गमछा बांधे हुए व्यक्ति दिखाई दे रहा है। आरोप लगाने वालों का दावा है कि गमछा बांधकर अटेंडेंस लगाने वाला व्यक्ति देवेंद्र कुमार बारस्कर नहीं, बल्कि कोई दूसरा व्यक्ति है।

यदि यह दावा सही है तो सवाल उठता है कि सरकारी अधिकारी की ई-अटेंडेंस आखिर कौन लगा रहा था? क्या किसी दूसरे व्यक्ति से उपस्थिति दर्ज करवाई जा रही थी? क्या विभाग ने इन तस्वीरों का सत्यापन किया है?

10 दिन की अटेंडेंस रिपोर्ट, जांच के लिए पर्याप्त सवाल

रिपोर्ट में 8, 9, 10, 11, 12, 15, 16, 18, 19 और 22 जून 2026 की उपस्थिति दर्ज है। कई तस्वीरों में चेहरे पर कपड़ा बंधा दिखाई देता है। 18 जून को चेक-आउट फोटो और लोकेशन उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख भी रिपोर्ट में है।

अब सवाल यह है कि क्या इन तस्वीरों में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान का सत्यापन किया गया? क्या संबंधित अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद थे या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की गई?

दो साल से चल रहा है ई-अटेंडेंस का खेल?

आरोप लगाने वालों का कहना है कि ई-अटेंडेंस में गड़बड़ी का यह मामला पिछले करीब दो वर्षों से चल रहा है। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी उपस्थिति व्यवस्था और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर इतने लंबे समय से चल रहे इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

उप संचालक बोले- कलेक्टर को भेजी गई फाइल, कार्रवाई अभी बाकी

इस मामले को लेकर कृषि विभाग के उप संचालक अश्विनी झरिया से चर्चा किए जाने पर बताया गया कि संबंधित मामले की फाइल कलेक्टर को भेजी गई है, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है तो जांच पूरी कर जिम्मेदारी तय करने में इतना समय क्यों लग रहा है?

आईफोन का शौक, लेकिन जनता के फोन उठाने में रुचि नहीं?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि साहब आईफोन चलाने के शौकीन हैं, लेकिन आम जनता के फोन उठाने में रुचि नहीं दिखाते। सरकारी अधिकारी से जनता को उम्मीद होती है कि उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और उनका समाधान किया जाएगा।

अब देखना होगा कार्रवाई कब होती है

सार्थक पोर्टल की ई-अटेंडेंस रिपोर्ट सामने आने के बाद कृषि विभाग और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित उपस्थिति किसने दर्ज की, फोटो और लोकेशन का सत्यापन कैसे हुआ तथा क्या किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा अधिकारी की उपस्थिति दर्ज की गई थी।

शराब के शौक को लेकर भी गंभीर सवाल, कलेक्टर साहब कार्रवाई कब करेंगे?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कृषि विभाग के अधिकारी देवेंद्र कुमार बारस्कर शराब के शौकीन हैं और उन्हें कई बार होटल में बैठकर शराब पीते हुए देखा गया है। आरोप है कि अधिकारी की इन गतिविधियों की जानकारी विभागीय अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

सवाल जनता का है, जवाब विभाग को देना होगा।

विभाग कब तक मेहरबान रहेगा? क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी या फिर ई-अटेंडेंस का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा?

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