नरवरे परिवार के कथित कब्जों पर कार्रवाई कब? बुलडोजर चलाने की उठी मांग : 197/2, 197/4 के बाद अब 7/3 को लेकर भी शिकायतें; गीता बाई, शिवचरण, भीम और अर्जुन नरवरे की भूमिका की जांच की मांग
Khabri Chacha
नैनपुर (मंडला) | विशेष रिपोर्ट
हल्का उमरिया में शासकीय भूमि से जुड़े विवाद लगातार गहराते जा रहे हैं। खसरा नंबर 197/2 पर बेदखली आदेश, 197/4 से जुड़े कथित भूमि विवाद और अब खसरा नंबर 7/3 पर भी स्थानीय लोगों द्वारा कब्जे के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन घटनाओं के बाद लोगों के बीच एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—आखिर नरवरे परिवार के कथित कब्जों पर कार्रवाई करने से राजस्व विभाग क्यों पीछे हटता दिखाई देता है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गीता बाई नरवरे, शिवचरण नरवरे, भीम नरवरे और अर्जुन नरवरे की भूमिका पहले से विवादित खसरों में जांच के दायरे में है। अब उनका कहना है कि खसरा नंबर 7/3 पर भी नरवरे परिवार द्वारा मकान बनाकर निवास किया जा रहा है। लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन तत्काल सीमांकन, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
गौरतलब है कि 197/2 और 197/4 से जुड़े पूरे प्रकरण में जिला कलेक्टर को विस्तृत शिकायत देकर गीता बाई नरवरे, शिवचरण नरवरे, भीम नरवरे और अर्जुन नरवरे की भूमिका सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों की जांच की मांग की जा चुकी है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि 197/2 पर बेदखली आदेश जारी हो चुके थे, 197/4 को लेकर विवाद सामने आए और अब 7/3 पर भी कब्जे के आरोप लग रहे हैं, तो तीनों मामलों की संयुक्त जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी भी खसरे पर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा या नियमों के विरुद्ध निर्माण पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
लोगों का आरोप है कि छोटे-छोटे अतिक्रमणों पर कार्रवाई तेजी से होती है, लेकिन जिन मामलों में लंबे समय से शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं, वहां कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई देती है। इसी कारण अब स्थानीय नागरिक यह मांग कर रहे हैं कि खसरा नंबर 7/3 सहित पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्च स्तरीय जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजस्व विभाग इस पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई कर सभी आरोपों की जांच करेगा, या फिर हल्का उमरिया की शासकीय भूमि से जुड़े ये विवाद यूं ही सवाल बनकर रह जाएंगे?