गुरूवार, 16 जुलाई 2026 | IST

छह साल पहले लगे लाखों के CCTV बंद, अब सुरक्षा के लिए जनता से चंदे की योजना : नगर पालिका ने बजट की कमी बताई, बैठक में जनसहयोग से CCTV लगाने की योजना पर चर्चा; पुराने कैमरों की जवाबदेही पर उठे सवाल।

Khabri Chacha

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नगर पालिका ने बजट की कमी बताई, बैठक में जनसहयोग से CCTV लगाने की योजना पर चर्चा; पुराने कैमरों की जवाबदेही पर उठे सवाल।

नैनपुर। शहर में लगातार बढ़ रही चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं के बीच नगर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को एसडीएम कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, थाना प्रभारी, नगर पालिका अध्यक्ष, पार्षदगण, व्यापारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं मीडिया की मौजूदगी में शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर चर्चा की गई। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर सभी ने सहमति जताई, लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर रही कि कैमरे लगाने के लिए जनसहयोग से राशि जुटाने का प्रस्ताव रखा गया।

नगर पालिका ने बजट की कमी बताई

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शहर में आधुनिक सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करने में लगभग 20 लाख रुपये का खर्च आ सकता है, जिसे नगर पालिका अकेले वहन करने की स्थिति में नहीं है। इसके बाद प्रस्ताव रखा गया कि कुछ राशि नगर पालिका और पुलिस विभाग उपलब्ध कराएंगे, जबकि शेष राशि व्यापारियों, समाजसेवियों और आम नागरिकों के सहयोग से जुटाने का प्रयास किया जाएगा। यह प्रस्ताव सामने आते ही शहर में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या अब सार्वजनिक सुरक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था के लिए भी जनता से आर्थिक सहयोग लिया जाना चाहिए।

छह साल पहले लाखों रुपये खर्च हुए, अब वे कैमरे कहां हैं?

बैठक के बाद शहरवासियों के बीच सबसे बड़ा सवाल छह वर्ष पहले लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को लेकर उठने लगा। नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका द्वारा लाखों रुपये खर्च कर शहर के विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन आज अधिकांश कैमरे बंद पड़े हैं। यदि समय पर उनका रखरखाव किया जाता, तो शायद दोबारा नई व्यवस्था बनाने और जनता से सहयोग लेने की नौबत नहीं आती। अब लोग यह जानना चाहते हैं कि पुराने कैमरे कब बंद हुए, उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी और उन्हें चालू रखने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए।

नगर पालिका की जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल

मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के तहत नगर पालिका का दायित्व नागरिक सुविधाओं का विकास, सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण, सड़कों, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव तथा नगर हित से जुड़े कार्यों का संचालन करना है। आधुनिक समय में सीसीटीवी कैमरे भी शहरी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। ऐसे में शहरवासियों का कहना है कि जब नगर पालिका संपत्ति कर, जलकर, बाजार शुल्क, दुकान किराया और अन्य माध्यमों से राजस्व प्राप्त करती है, तो सुरक्षा जैसी आवश्यक व्यवस्था के लिए अलग से चंदा जुटाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

पहले उपलब्ध संसाधनों का उपयोग क्यों नहीं?

बैठक के बाद कई नागरिकों ने सवाल उठाया कि यदि नगर पालिका आर्थिक रूप से असमर्थ थी, तो क्या राज्य शासन से विशेष अनुदान की मांग की गई? क्या पुराने सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त करने का विकल्प तलाशा गया? क्या किसी अन्य सरकारी योजना या वित्तीय स्रोत से राशि उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया? लोगों का कहना है कि जनता से आर्थिक सहयोग मांगने से पहले सभी वैधानिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

सांसद डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते से भी उम्मीदें

शहर के नागरिकों का मानना है कि यदि नगर पालिका अकेले इस योजना को पूरा करने में सक्षम नहीं है, तो मंडला संसदीय क्षेत्र के माननीय सांसद डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते भी इस दिशा में पहल कर सकते हैं। लोगों का सुझाव है कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के प्रावधानों के अनुरूप यदि संभव हो, तो शहर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी व्यवस्था विकसित करने की अनुशंसा की जा सकती है। नागरिकों का कहना है कि इससे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा और नगर को एक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था मिल सकेगी।

cctv

जनता सहयोग के खिलाफ नहीं, लेकिन जवाबदेही भी जरूरी

शहर के अनेक नागरिकों का कहना है कि वे शहर की सुरक्षा के लिए सहयोग देने के विरोध में नहीं हैं। यदि आवश्यकता होगी तो समाज आगे भी आएगा, लेकिन उससे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि छह वर्ष पहले लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे आज बंद क्यों हैं और उनकी जिम्मेदारी किसकी थी। लोगों का कहना है कि यदि पुरानी व्यवस्था की जवाबदेही तय नहीं होगी, तो भविष्य में फिर यही स्थिति बन सकती है और दोबारा जनता से सहयोग लेने की नौबत आ सकती है।

अब इन सवालों के जवाब का इंतजार

फिलहाल बैठक में केवल सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना और जनसहयोग से राशि जुटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। अंतिम निर्णय और योजना के क्रियान्वयन को लेकर आगे क्या फैसला होगा, इस पर पूरे शहर की नजर बनी हुई है। वहीं शहरवासी प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पुराने सीसीटीवी सिस्टम की स्थिति, उसके रखरखाव और भविष्य की जवाबदेही पर भी पारदर्शी रूप से जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि नगर की सुरक्षा का स्थायी और भरोसेमंद समाधान निकल सके।

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