गुरूवार, 30 जुलाई 2026 | IST

नैनपुर नगर पालिका में टेंडरों की बाढ़, जनता बोली—पहले पानी, सड़क और नाली दो : ₹20 लाख कंसल्टेंसी, ₹30 लाख लाइट खरीदी और ₹24 लाख वाहन हायरिंग पर सवाल, ईओडब्ल्यू जांच व भौतिक सत्यापन की मांग तेज।

Khabri Chacha

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₹20 लाख कंसल्टेंसी, ₹30 लाख लाइट खरीदी और ₹24 लाख वाहन हायरिंग पर सवाल, ईओडब्ल्यू जांच व भौतिक सत्यापन की मांग तेज।

शहर में पेयजल, सड़क, नाली और सफाई जैसी मूलभूत समस्याएं बरकरार हैं, लेकिन नगर पालिका लगातार लाखों रुपये के नए टेंडर जारी कर रही है। पहले स्ट्रीट लाइट खरीदी पर लाखों रुपये खर्च हुए, अब फिर नई इलेक्ट्रिकल खरीदी, कंसल्टेंसी और वाहन हायरिंग के टेंडर सामने आए हैं। नागरिक अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रत्येक खरीदी के भौतिक सत्यापन की मांग कर रहे हैं।

विकास नहीं, टेंडरों की चर्चा में नगर पालिका

नैनपुर नगर पालिका परिषद इन दिनों विकास कार्यों से अधिक लगातार जारी हो रहे टेंडरों को लेकर चर्चा में है। शहर के कई वार्ड आज भी नियमित पेयजल, बेहतर सड़क, पक्की नालियां, सफाई व्यवस्था और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि जिन कार्यों का सीधा लाभ आम जनता को मिलना चाहिए, वे आज भी अधूरे हैं, जबकि लाखों रुपये की खरीद और कंसल्टेंसी पर लगातार खर्च किया जा रहा है।

₹20 लाख की कंसल्टेंसी पर सवाल

नगर पालिका ने विभिन्न विकास कार्यों के सर्वे, डीपीआर तैयार करने एवं कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए लगभग ₹20 लाख का टेंडर जारी किया है। नगरवासियों का सवाल है कि जब नगर पालिका में इंजीनियर एवं तकनीकी स्टाफ पहले से उपलब्ध है, तब बाहरी कंसल्टेंसी पर इतना बड़ा खर्च क्यों किया जा रहा है? यदि तकनीकी अमला सक्षम है तो अतिरिक्त खर्च का औचित्य क्या है, और यदि सक्षम नहीं है तो उसकी जवाबदेही किसकी है?

हर साल लाखों की लाइट खरीदी, फिर भी नई खरीदी क्यों?

नगर पालिका ने अब लगभग ₹30 लाख की इलेक्ट्रिकल सामग्री खरीदी का नया टेंडर भी जारी किया है। इससे पहले भी लगभग ₹24 लाख, ₹5 लाख और ₹10 लाख की इलेक्ट्रिकल सामग्री एवं स्ट्रीट लाइट खरीदी जा चुकी है। ऐसे में नागरिक पूछ रहे हैं कि पहले खरीदी गई सामग्री का उपयोग कहां हुआ, कितनी सामग्री अभी स्टॉक में है, कितनी खराब हो गई और कितनी वास्तव में वार्डों में स्थापित की गई? यदि हर वर्ष नई खरीदी करनी पड़ रही है तो इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

50 वॉट को 200 वॉट बताने के आरोप, जांच की मांग तेज

इलेक्ट्रिकल खरीदी को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह सामने आ रहा है कि कुछ स्थानों पर 50 वॉट क्षमता की एलईडी स्ट्रीट लाइट को रिकॉर्ड में 200 वॉट दर्शाए जाने की शिकायतें उठ रही हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।

हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए नागरिक मांग कर रहे हैं कि सभी खरीदी गई स्ट्रीट लाइटों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए, जिसमें प्रत्येक लाइट की वास्तविक क्षमता, कंपनी, मॉडल, खरीद मूल्य और स्थापना स्थल की जांच की जाए। यदि आरोप गलत हैं तो जांच से अधिकारियों की स्थिति स्पष्ट होगी, और यदि सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

₹24 लाख की वाहन हायरिंग भी सवालों के घेरे में

नगर पालिका ने वेस्ट ट्रांसपोर्टेशन के लिए लगभग ₹24 लाख की वाहन हायरिंग का टेंडर भी जारी किया है। नागरिक पूछ रहे हैं कि यदि नगर पालिका पहले से संसाधनों पर खर्च कर रही है, तो हर बार वाहन किराए पर लेने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? क्या स्थायी व्यवस्था बनाना अधिक किफायती नहीं होता?

भौतिक सत्यापन की मांग हुई तेज

नगरवासियों की मांग है कि पिछले वर्षों में खरीदी गई प्रत्येक स्ट्रीट लाइट, केबल, पोल और अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री का वार्डवार भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही स्टॉक रजिस्टर, खरीद बिल, भुगतान, स्थापना स्थल और उपयोगिता प्रमाण-पत्र को सार्वजनिक किया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जनता के पैसे से खरीदी गई सामग्री वास्तव में जमीन पर दिखाई भी दे रही है या नहीं।

वर्तमान कार्यकाल पर बढ़ रहे सवाल

लगातार खरीद, टेंडर और खर्चों के बीच शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहने से नगर पालिका का वर्तमान कार्यकाल धीरे-धीरे विवादों में घिरता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका की प्राथमिकता पहले जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि लगातार नई-नई खरीदी और कंसल्टेंसी पर खर्च करना।

सीएमओ, इंजीनियरिंग शाखा और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग

शहर में कई नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका की खरीद और टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। कुछ लोगों ने सीएमओ, इंजीनियरिंग शाखा तथा खरीद प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नागरिकों की मांग है कि पूरे मामले की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), लोकायुक्त या किसी सक्षम स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जांच में यह देखा जाए कि कंसल्टेंसी की आवश्यकता क्या थी, इलेक्ट्रिकल सामग्री की खरीदी नियमों के अनुसार हुई या नहीं, स्ट्रीट लाइटों की वास्तविक क्षमता क्या है, वाहन हायरिंग का औचित्य क्या था तथा जनता के धन का उपयोग शासन के नियमों के अनुरूप किया गया या नहीं।

जनता का सीधा सवाल

नैनपुर की जनता विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रही है। लोगों की मांग केवल इतनी है कि करदाताओं के पैसे का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो और सबसे पहले पानी, सड़क, नाली, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो स्वतंत्र जांच से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सभी सवाल स्वतः समाप्त हो जाएंगे। वहीं यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना जनहित में आवश्यक होगी।

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