25-30 लाख की दुकानें, सुविधा गायब: क्या नैनपुर नगर पालिका ने खरीदारों को ठगा है? : पार्किंग और ट्रांसफॉर्मर हटाने का वादा अधूरा, बारिश में जलभराव-कीचड़; ऑटो-ठेलों से रास्ता जाम, स्कूल के बच्चे भी परेशान
Khabri Chacha
नैनपुर। शहर के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त स्थानों में शामिल बस स्टैंड के ठीक सामने बने नगर पालिका के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की व्यवस्थाएं इन दिनों सवालों के घेरे में हैं। बारिश ने कॉम्प्लेक्स के आसपास की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी है। परिसर से जुड़े रास्तों में जगह-जगह जलभराव और कीचड़ की स्थिति है, जबकि कॉम्प्लेक्स के सामने ऑटो, मालवाहक वाहन और ठेले खड़े रहने से आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।
यह वही शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है, जिसके निर्माण का स्थानीय लोगों ने शुरुआत से ही विरोध किया था। विरोध के बावजूद नगर पालिका की पिछली परिषद और वर्तमान परिषद के कार्यकाल में इस काम को पूरा कराया गया। लोगों को उम्मीद थी कि बस स्टैंड के सामने स्थित होने के कारण यह कॉम्प्लेक्स शहर का व्यवस्थित और सुविधाजनक व्यावसायिक केंद्र बनेगा, लेकिन मौजूदा स्थिति इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर रही है।
25 से 30 लाख तक में नीलाम हुई दुकानें
नगर पालिका द्वारा कॉम्प्लेक्स की कुछ दुकानों की नीलामी करीब 25 से 30 लाख रुपये तक में की गई है। इतनी बड़ी राशि खर्च कर दुकान खरीदने वाले व्यापारियों का कहना है कि उन्हें दुकान के साथ बेहतर पार्किंग, सुगम आवागमन और व्यवस्थित परिसर की उम्मीद थी।
दुकानदारों के अनुसार, दुकान खरीदते समय उन्हें यह भरोसा भी दिलाया गया था कि कॉम्प्लेक्स के सामने लगा ट्रांसफॉर्मर हटाया जाएगा और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन समय बीतने के बाद भी दोनों प्रमुख समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
बस स्टैंड के सामने, फिर भी पार्किंग का ठिकाना नहीं
कॉम्प्लेक्स की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह बस स्टैंड के ठीक सामने स्थित है, जहां पहले से ही यात्रियों और वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे व्यस्त स्थान पर व्यवस्थित पार्किंग और यातायात प्रबंधन की जरूरत और भी ज्यादा है।
लेकिन तस्वीरों में कॉम्प्लेक्स के सामने और आसपास ऑटो, मालवाहक वाहन तथा ठेले रास्ते के आसपास खड़े दिखाई दे रहे हैं। इससे ग्राहकों और दुकानदारों के लिए आवागमन मुश्किल होता है। व्यापारियों का कहना है कि जिस कॉम्प्लेक्स में लाखों रुपये देकर दुकानें खरीदी गईं, वहां पार्किंग की सुविधा नहीं होने के कारण ग्राहक भी आसानी से दुकान तक नहीं पहुंच पाते।

बारिश ने खोल दी जलनिकासी की पोल
हाल की बारिश के बाद कॉम्प्लेक्स से लगे मार्गों पर पानी जमा हो गया। पानी के साथ मिट्टी और गंदगी मिलने से जगह-जगह कीचड़ फैल गया। पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कॉम्प्लेक्स बस स्टैंड के सामने है और यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। यदि बारिश के दौरान रास्ते में जलभराव और कीचड़ बना रहे तो यात्रियों, ग्राहकों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को सीधे परेशानी होती है।
केंद्रीय विद्यालय के बच्चों का रास्ता भी प्रभावित
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से जुड़ा अस्थायी केंद्रीय विद्यालय भी इस अव्यवस्था से अछूता नहीं है। विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते में बारिश के बाद कीचड़ और पानी जमा होने से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है।
एक ओर बच्चों को कीचड़ और जलभराव वाले रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर बाहर खड़े ऑटो और मालवाहक वाहन रास्ते को और बाधित कर देते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए इस मार्ग को व्यवस्थित करना जरूरी है।
दुकानदार बोले—लाखों दिए, सुविधा कब मिलेगी?
दुकानदारों की नाराजगी अब केवल बारिश के जलभराव तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने नगर पालिका की नीलामी में लाखों रुपये खर्च कर वैध दुकानें खरीदी हैं, इसलिए उन्हें कम से कम मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए।
व्यापारियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि दुकानें नीलाम करते समय पार्किंग और ट्रांसफॉर्मर हटाने जैसी सुविधाओं का भरोसा दिया गया था, तो उन वादों को अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया?
दुकानदारों का कहना है कि स्थिति ऐसी बन गई है कि लाखों रुपये देकर दुकान खरीदने वालों को भी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि सड़क और आसपास के हिस्सों पर अव्यवस्थित रूप से खड़े ऑटो, मालवाहक वाहन और ठेले आसानी से जगह घेर लेते हैं।
नगर पालिका की योजना पर उठ रहे सवाल
बस स्टैंड के सामने इतना महत्वपूर्ण व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने के बावजूद यदि पार्किंग, जलनिकासी और यातायात व्यवस्था का स्थायी समाधान नहीं है, तो यह नगर पालिका की योजना और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब व्यापारियों और स्थानीय लोगों की नजर नगर पालिका प्रशासन पर है कि जलभराव और कीचड़ से राहत के लिए स्थायी जलनिकासी व्यवस्था कब बनाई जाएगी, पार्किंग की व्यवस्था कब होगी, ट्रांसफॉर्मर हटाने का वादा कब पूरा होगा और बस स्टैंड के सामने ऑटो-मालवाहक वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग पर कब नियंत्रण किया जाएगा।
फिलहाल तस्वीर यही है—बस स्टैंड के सामने लाखों रुपये की दुकानें, लेकिन बारिश में जलभराव और कीचड़; कॉम्प्लेक्स के सामने अव्यवस्थित वाहन और इसी रास्ते से परेशान होकर स्कूल पहुंचते बच्चे। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस कॉम्प्लेक्स को शहर की बेहतर व्यावसायिक व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया था, वह आज अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए ही क्यों जूझ रहा है?