रेलवे हर जगह आधुनिक, फिर नैनपुर में अब भी ब्रिटिशकालीन सड़कों की सोच क्यों? : 100 साल पुरानी चौड़ाई वाली सड़क पर बढ़ता यातायात, जनता बोली—अब 1922 नहीं, 2026 के मानकों पर बने सड़क।
Khabri Chacha
नैनपुर। भारतीय रेलवे आज दुनिया की आधुनिक रेल व्यवस्थाओं की बराबरी करने का दावा कर रही है। देशभर में रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प हो रहा है, वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेनें दौड़ रही हैं, नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है और यात्रियों की सुविधाओं पर लगातार करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन इन्हीं सबके बीच नैनपुर रेलवे कॉलोनी की सड़कें आज भी मानो ब्रिटिश शासनकाल की सोच में कैद नजर आती हैं।
दुर्गा मंदिर से कान्हा पार्क तक जाने वाला मार्ग लगभग उसी चौड़ाई में बना हुआ है, जिस समय इसका निर्माण वर्ष 1922 के आसपास हुआ था। उस समय रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों के आवागमन का प्रमुख साधन साइकिल हुआ करती थी। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अधिकांश कर्मचारियों और अधिकारियों के पास कारें और अन्य चारपहिया वाहन हैं, वहीं हजारों स्थानीय नागरिक भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद सड़क की चौड़ाई में समय के अनुरूप कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं किया गया।
स्थिति यह है कि जब एक चारपहिया वाहन इस सड़क से गुजरता है तो सामने से आने वाले दोपहिया वाहन चालकों को सड़क छोड़कर नीचे उतरना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। यह मार्ग वार्ड क्रमांक 3, 5, 6, 7, 8, 9 एवं 13 के अलावा गांधी, अटरिया सहित आसपास के गांवों के लोगों के लिए भी प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों कर्मचारी, अधिकारी, छात्र और आम नागरिक इसी सड़क से गुजरते हैं।
अब इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे पूरे देश में आधुनिक सोच के साथ विकास कार्य कर सकता है तो नैनपुर में सड़कों के मामले में अब भी ब्रिटिशकालीन व्यवस्था क्यों लागू है? लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या रेलवे आज भी अंग्रेजों के समय तय की गई सड़क व्यवस्था को ही पर्याप्त मान रहा है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आज देश में सड़क निर्माण के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानक लागू हैं। सामान्य दो-लेन सड़क में प्रत्येक लेन की मानक चौड़ाई लगभग 3.75 मीटर निर्धारित की गई है, ताकि वाहनों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके। लोगों का कहना है कि कम से कम इसी मानक के अनुरूप सड़क का चौड़ीकरण किया जाना चाहिए, जिससे चारपहिया और दोपहिया वाहन सुरक्षित रूप से एक साथ निकल सकें।
जनता का मानना है कि यह केवल सड़क चौड़ी करने का मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और भविष्य की आवश्यकता का प्रश्न है। यदि समय रहते इस सड़क का चौड़ीकरण नहीं किया गया तो बढ़ते यातायात के बीच किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों का कहना है कि रेलवे को अब नैनपुर में भी 1922 नहीं, बल्कि 2026 की जरूरतों और आधुनिक मानकों के अनुसार निर्णय लेना होगा। तभी विकास के दावों का वास्तविक लाभ स्थानीय नागरिकों तक पहुंच सकेगा।